Essay On Sarojini Naidu In Marathi

वे उसे हैदराबाद के नबाब को भी दिखाते है, जिसे देख वे बहुत खुश होते है और सरोजनी जी को विदेश में पढने के लिए स्कालरशिप देते है.

इसके बाद वे आगे की पढाई के लिए लन्दन के किंग कॉलेज चली गई, इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के गिरतों कॉलेज से पढाई की.

12 साल की उम्र में सरोजनी जी ने मद्रास यूनिवर्सिटी में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था, जिससे उनकी बहुत वाहवाही और नाम हुआ.

सरोजनी जी के पिता चाहते थे, की वे वैज्ञानिक बने या गडित में आगे पढाई करे, लेकिन उनकी रूचि कविता लिखने में थी, वे एक बार अपनी गडित की पुस्तक में 1300 लाइन की कविता लिख डालती, जिसे उनके पिता देख अचंभित हो जाते है और वे इसकी कॉपी बनवाकर सब जगह बंटवाते है.

उनके 4 बच्चे हुए, जिसमें उनकी बेटी पद्मजा सरोजनी जी की तरह कवित्री बनी और साथ ही राजनीती में उतरी और 1961 में पश्चिम बंगाल की गवर्नर बनी.सरोजनी जी ने शादी के बाद भी अपना काम जारी रखा, वे बहुत सुंदर सुंदर कविता लिखा करती थी, जिसे लोग गाने के रूप में गाते थे.

1905 में उनकी कविता बुल बुले हिन्द प्रकाशित हुई, जिसके बाद उन्हें सब जानने पहचानने लगे.

Belonging to the Pulaya community who were severely discriminated against, she was among the first generation of people to be educated from the community and the first woman to wear an upper cloth.

In 1945, Dakshayani was nominated to the by the State Government.

सरोजनी जी भारत देश की सभी औरतों के लिए आदर्श का प्रतीक है, वे एक सशक्त महिला थी, जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है.विभूति अग्रवाल मध्यप्रदेश के छोटे से शहर से है.

ये पोस्ट ग्रेजुएट है, जिनको डांस, कुकिंग, घुमने एवम लिखने का शौक है.

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